मुँह की बात: निदा फ़ाज़ली

By avinashkishoreshahi

Munh ki baat was the title song of  “Neem Ka Ped”: an old TV serial based on an eponymous novel by Rahi Masoom Raza. Jagjit Singh sung it beautifully. Enjoy! 

मुँह की बात सुने हर कोई
दिल के दर्द को जाने कौन
आवाज़ों के बाज़ारों में
ख़ामोशी पहचाने कौन ।

सदियों-सदियों वही तमाशा
रस्ता-रस्ता लम्बी खोज
लेकिन जब हम मिल जाते हैं
खो जाता है जाने कौन ।

जाने क्या-क्या बोल रहा था
सरहद, प्यार, किताबें, ख़ून
कल मेरी नींदों में छुपकर
जाग रहा था जाने कौन ।

मैं उसकी परछाई हूँ या
वो मेरा आईना है
मेरे ही घर में रहता है
मेरे जैसा जाने कौन ।

किरन-किरन अलसाता सूरज
पलक-पलक खुलती नींदें
धीमे-धीमे बिखर रहा है
ज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन |

 While Nida Fazli says:

मुंह कि बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाजारों में खामोशी पहचाने कौन
Bashir Badra writes:
मैं चुप था तो बहती हवा रूक गयी
जुबां सब समझते जज़्बात की
Who do you think is closer to truth?

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